धर्मगुरु गुरु ढालदास बाबा जी
गुरु परंपरा में स्थान
गुरुवंश वृक्ष के अनुसार धर्मगुरु गुरु ढालदास बाबा जी, गुरु मुक्तावन दास बाबा जी (गुरुगद्दी खपरी) की परंपरा से जुड़े हैं। यह वंश-क्रम गुरु घासीदास बाबा जी से आगे इस प्रकार चलता है — गुरु घासीदास बाबा जी, उनके चतुर्थ पुत्र गुरु आगर दास बाबा जी, गुरु अजब दास बाबा जी, गुरु मुक्तावन दास बाबा जी (गुरुगद्दी खपरी), गुरु बालदास बाबा जी और तत्पश्चात् गुरु ढालदास बाबा जी।
गुरु परंपरा और सतनाम पंथ
सतनाम पंथ की स्थापना संत गुरु घासीदास बाबा जी ने की, जिनका मूल संदेश "मनखे मनखे एक बरोबर" तथा "सतनाम" (सत्य का नाम) है। गुरु गद्दी की परंपरा गुरु घासीदास जी के पश्चात् उनके पुत्र गुरु अमरदास जी तथा राजा गुरु बालकदास जी और आगे गुरुवंश के सदस्यों द्वारा संभाली जाती रही है।
सम्पूर्ण वंशावली गुरुवंश वृक्ष तथा सदस्य-सूची गुरु परिवार पृष्ठ पर देखी जा सकती है।